नई दिल्ली,
(समाजहित
एक्सप्रेस)
विशेष आलेख
- श्रीप्रकाश
सिंह
निमराजे,
अध्यक्ष
- गोपाल
किरन
समाजसेवी
संस्था
(GKSSS)
श्रीलंका
में पोया दिवस का बड़ा धार्मिक
और सांस्कृतिक महत्व है। बौद्ध अनुयायी इस दिन शील,
ध्यान, प्रज्ञा और आत्मचिंतन करते
हैं। मिहिंदु पोया अरहंत महिंद थेरो की स्मृति से
जुड़ा है, जिन्हें श्रीलंका में बौद्ध धम्म का प्रमुख प्रवर्तक
माना जाता है।
कौन थे
अरहंत
महिंद
थेरो?
बौद्ध
परंपरा के अनुसार अरहंत
महिंद थेरो सम्राट अशोक के पुत्र थे।
तृतीय बौद्ध संगीति के बाद उन्हें
श्रीलंका में धम्म प्रचार के लिए भेजा
गया था। उस समय राजा
देवानंपिय तिस्स का शासन था।
मिहिंतले में हुई उनकी भेंट श्रीलंका के धार्मिक इतिहास
की अहम घटना है। इसके बाद श्रीलंका में बौद्ध धम्म को राजकीय संरक्षण
मिला।
उनकी
बहन संघमित्रा थेरि भी बोधिवृक्ष की
शाखा श्रीलंका ले गईं और
भिक्षुणी संघ की स्थापना की।
दोनों का योगदान भारत-श्रीलंका के प्राचीन सांस्कृतिक
संबंधों की विरासत है।
मिहिंदु पोया
और
अष्टशील
का
महत्व
पोया
दिवस चंद्र पंचांग पर आधारित है,
पोसोन पूर्णिमा जून महीने में मनाई जाती है। इस दिन बौद्ध
अनुयायी अष्टशील का पालन करते
हैं। अष्टशील 8 नैतिक नियम हैं:
1. प्राणी
हिंसा से बचना
2. चोरी
से बचना
3. ब्रह्मचर्य
4. असत्य
से बचना
5. नशे
से दूर रहना
6. मध्याह्न
बाद भोजन न करना
7. मनोरंजन-श्रृंगार से विरत रहना
8. विलासपूर्ण
शय्या और धन के
लेन-देन से बचना
इसका
उद्देश्य नशे, लालच और हिंसा से
दूर होकर आत्मसंयम का अभ्यास करना
है।
महा मंगल
सुत्त
और
अशोक
की
धम्म
नीति
महा
मंगल सुत्त (सुत्तनिपात 2.4) में कहा गया है - योग्य का आदर, विनम्रता,
संतोष, कृतज्ञता और उचित समय
पर धम्म श्रवण ही सर्वोच्च मंगल
है।
सम्राट
अशोक ने भी अपने
शिलालेखों में माता-पिता का सम्मान, दया,
सहिष्णुता और लोककल्याण पर
जोर दिया।
बहुजन समाज
के
लिए
संदेश
लेख
में कहा गया है कि मिहिंदु
पोया बहुजन आंदोलन के लिए शिक्षा,
आत्मसम्मान, समानता और न्याय पर
विचार करने की प्रेरणा है।
सच्चा परिवर्तन नारे से नहीं, बल्कि
शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों
से आएगा।
आधुनिक जीवन
में
प्रासंगिकता:
आज
के तनाव और उपभोगवाद के
दौर में अहिंसा, ईमानदारी, संयम, करुणा, समानता और प्रज्ञा जैसे
मूल्य ही समाज को
सही दिशा दे सकते हैं।
"सच्चा
मंगल शील, प्रज्ञा और समता में
है। बुद्धं शरणं गच्छामि।"


1 Comments
सराहनीय
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