अध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार, पैनल बनाने में फंसा पेंच, पुराने साथी बने विरोधी
दिल्ली, समाजहित
एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) । जयपुर/दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026 - अखिल भारतीय रैगर महासभा के चुनाव की घोषणा
8-9 अगस्त 2026 को श्री रैगर छात्रावास, जयपुर में हुई बैठक में हुई, और उसी दिन से
महासभा में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अपने-अपने पैनल
बनाने और मतदाताओं को साधने के लिए जोड़तोड़ में लग गए हैं।
प्राप्त जानकारी
के अनुसार, अध्यक्ष पद पर इस बार कई चेहरे दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिसके कारण पैनल
बनाने का काम अटक गया है। सभी प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों के आंकड़े जोड़ रहे हैं
कि कौन मतदाता किसका समर्थक है। रोज आंकड़े बनते-बिगड़ते हैं, यही गुणा-भाग चुनावी
रणनीति को पलट सकता है।
भाईचारा टूटा, पुराने साथी बने विरोधी
सबसे चौंकाने
वाली बात यह है कि जिन्होंने सालों तक भाईचारे के साथ मिलकर काम किया था, वे मन मुताबिक
पद न मिलने पर ऐन वक्त पर पाला बदलकर विरोधी खेमे में चले गए हैं। जिन्होंने पिछले
महासभा चुनाव में वरिष्ठजनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जीत हासिल की थी, वे भी अब
विपक्ष में खड़े हो गए हैं। कई ऐसे उम्मीदवार भी मैदान में हैं जो पूर्व में महासभा
या अन्य बड़ी संस्थाओं के चुनाव हार चुके हैं।
धनबल और आवभगत का दिखेगा जोर
इस बार के
चुनाव में धनबल, साधन और आवभगत का सीन भी देखने को मिलेगा। चर्चा है कि मतदाताओं को
लुभाने के लिए हवाई यात्रा, एसी ट्रेन, थ्री स्टार होटल, एसी कार, पिकनिक, कन्वेंस,
गाइड और लजीज व्यंजनों तक का इंतजाम किया जा रहा है। यह सब इस चुनाव की फिल्म का हिस्सा
बनने वाला है।
समाज का भविष्य मतदाताओं के हाथ में
सभी प्रत्याशी
अपनी-अपनी जीत के कयास लगा रहे हैं, क्योंकि चुनाव में कोई हारने के लिए नहीं खड़ा
होता। लेकिन वास्तविकता यह है कि एक पक्ष जीतेगा और दूसरा हारेगा।समाज के प्रबुद्धजनों
का कहना है कि मतदाताओं को सरल, स्वच्छ छवि, निपुण और बिना पद की लालसा वाले, सेवा
कार्य में निपुण प्रत्याशी का ही चयन करना चाहिए। हारने वाले, घोटालेबाज और लालच देने
वालों से सचेत रहने की जरूरत है।रैगर समाज एक परिश्रमी और बुद्धिजीवी समाज है। इस बहती
गंगा में सभी हाथ धोएं, लेकिन गंगा को मैली न होने दें। आपका वोट ही समाज का भविष्य
तय करेगा।


0 Comments