मैं किसी
और
समाज
की
नहीं,
अपने
ही
समाज
की
बात
करता
हूँ...
इसका
बेहरूपियापन
आप
भी
जानते
हैं
और
मैं
भी
..
🙏🌹पीएम झिंगोनिया 🙏🌹सिंगोद खुर्द, जयपुर
समाज
के उच्च शिक्षित.. उच्च पद प्रतिष्ठित लोग
अपने पद की चमक
धमक.. ठशक और
लाइम लाइट में इतने खो जाते हैं
कि.. समाज की उस वक़्त
दसा, दिशा और दुर्दशा दूर-
दूर तक दिखाई नहीं
देती.. जब पावर में
रहतें है.. तब कुछ करते
नहीं .. जैसे ही फ्यूज ट्यूब
लाइट हो जाते हैं..
पावर और चमक ख़त्म
हो जाती है...तब उन्हें लाइम
लाइट में रहने का जो चस्का
लग चुका है उसी में
बने रहने के लिये समाजसेवी
बनकर समाज में आते हैं..सही भी है.. पद
की गरिमा के अनुरूप उन्हें
सम्मान मिलता भी है और
मिलना भी चाहिये ।
बस
इसी का वो फायदा
उठाते हुये.. अपना जनाधार.. और पहचान बताकर
किसी न किसी राजनैतिक
पार्टी की टिकिट लेकर
नेता बनने की दौड़ में
शामिल हो जाते हैं...ऐसा होना भी चाहिये क्योंकि
किसी भी समाज की
ताकत तब मजबूत
बनती है जब वह
राजनैतिक तौर भी
पर उपस्थित रहें.. लेकिन अब क्या..? राजनीति
में आने के बाद वह
फिर उसी ढर्रे पर चल पड़े..
जो पहले कभी थे.. वहां पर भी अपनी
ही रोटियां सेकने लगे... फिर समाज किस से अपेक्षा करें..?
वे
लोग भी अपने और
अपनों को पोषित करने
लगते हैं....अपने सेवाकाल में जो अर्जित किया
था उस पर lock लगा
देते हैं...जैसे कि व्यवस्थाएं बदल
जायेगी यां औलाद नालायक हो जायेगी..प्रॉपर्टी,
मकान, गहने खरीद कर,जो किसी
के काम के नहीं सिवाय
उनकी औलाद के...मैं यह नहीं कह
रहा कि जो आपकी
अर्जित सम्पति है उसे लुटा
दो... परन्तु उसे अचल से चल तो
कर सकते हो, फिर भी क्या उनमें
इतनी समझ नहीं यां रिस्क लेने की क्षमता ही
नहीं कि वो उस
सम्पति को किसी अच्छे
Business में... यां कोई Fectory खोल सकें ताकि समाज के लोगो को
एक नेतृत्व मिल सकें... व्यापारिक रास्ते खुल सकें.. ।
सनद
रहे कि कोई भी
समाज, चाहे सरकार
कोई भी हो जब
तक वो समाज money power बैंक नहीं
बनता, टेक्सपेयर नहीं बनता.. सरकार की अर्थव्यवस्था में
रीढ़ की हड्डी नहीं
बनता तब तक वह
समाज अपने हक़ के लिये
अंतिम पंक्ति में खड़ा रहेगा भिखारियों की तरह..इसलिए
समाज के बुध्दिजीवीयों से
अपेक्षा है कि वो
केवल नौकरियों के लिये समाज
को प्रोत्साहित न करें बल्कि
व्यावसायिक रास्ते भी सुझायें.. उन्हें
संरक्षण दें.. प्रोत्साहित करें... ।
समाज
के प्रति यह आपकी ईमानदार
पहल और कर्तव्य होगा...क्योंकि किसी भी समाज में
गलत परम्परा का प्रारम्भ भी
और अंत भी केवल उच्च
शिक्षित और उच्च पद
पर बैठा व्यक्ति ही करता है...
जैसे किसी विवाह में 1 करोड़ लगाने की क्षमता केवल
अमीर रखता है.. गरीब नहीं... और यही देखा
देखी बाकि समाज के लोग अपनाने
लगते हैं... भले ही कर्ज में
डूब कर मर जाये.. ।
अतः
किसी पद की इच्छा
से कहीं ज्यादा इच्छा समाज की व्यवस्थाओं, असहाय
का सहारा और कमजोर की
आवाज बनने की होनी चाहिये..क्योंकि कुछ मुट्ठी भर लोगों का
समुह नहीं होता समाज.. एक विस्तृत विचारधारा
होती है जिसमें स्त्री
और पुरुष सबके विचारों को सुना और
समझा जाना चाहिये ...!!
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस लेख में प्रस्तुत किये गये समस्त
विचार लेखक के अपने निजी विचार हैं और यह आवश्यक नहीं है कि समाजहित एक्सप्रेस इससे
सहमत हो l


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