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रैगर समाज से समाजहित में एक वैचारिक अपील

 


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) । नई दिल्ली। रैगर समाज के प्रबुद्ध लोगो ने चर्चा के दौरान रैगर समाज से समाजहित में एक वैचारिक अपील की, अपील में कहा गया है कि भारतीय समाज में रैगर समाज सदियों से भेदभाव और उत्पीड़न झेल रहा है। संविधान ने सुरक्षा तो दी, लेकिन आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक शोषण आज भी जारी है । जिस पर समाज के युवा, बुजुर्ग और महिलाओ ने चिंतन शुरू कर दिया है ।

मुख्य बातें जो कही गईं -

1. जाति जन्म से है: कोई भी आयोग SC को सामान्य वर्ग में नहीं ले जा सकता। हम कितने भी यज्ञ कर लें, गीता-रामायण-भागवत पढ़ लें, गायत्री मंत्र जप लें, जनेऊ पहन लें, चोटी में गांठ बांध लें - रैगर जाति से छुटकारा नहीं मिलेगा। तो फिर हम किस दर्जे के भ्रम में जी रहे हैं?

2. पाखंड का खेल: दो-तीन जातियों के लोगों ने साजिशन बहुजन समाज को वास्तविक ज्ञान से दूर रखकर ईश्वर के भ्रम और पाखंड में उलझाए रखा, ताकि उनकी व्यवस्था चलती रहे।

3. असली रास्ता क्या है? हर इंसान की आत्मा में परमात्मा है। मानवता के लिए अच्छे कर्म करो, जीवों पर दया करो, प्रकृति से खिलवाड़ मत करो। माता पिता और बुजुर्गो की सेवा करो।

समाज के लिए 5 संकल्प -

> 1. समाज की जाजम पर बैठो, चर्चा करो, सभाएं करो।

> 2. सरकार से आर्थिक मजबूती की ठोस योजनाएं मांगो और उन योजनाओ को क्रियान्वित करवाओ, समाजहित में स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल और पुस्तकालय खुलवाओ ।

> 3. अपनी आबादी के हिसाब से शासन-प्रशासन में हिस्सेदारी और देश में जातिगत जनगणना की मांग करो।

> 4. गरीब बच्चों की शिक्षा, नौकरी, रोजगार और व्यवसाय पर फोकस करो।

> 5. उसी पार्टी को वोट दो जो आपके समाज को सामाजिक न्याय दिलाये, समाज को आर्थिक, सामाजिक विकास की राह पर ले जाय और राजनीतिक क्षेत्र में आबादी के हिसाब से संगठन में हिस्सेदारी दिलवाये ।

अंत में नारा - जागरूक बनो, संगठित रहो, एकजुट होकर अपने अधिकार-अस्तित्व की आवाज उठाओ।

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