सीकर
की रैगर समाज की बेटी अर्चना
बिलोनिया ने किर्गिस्तान में
192.5 किलो वजन उठाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, दो स्वर्ण पदक
जीतकर लौटीं, रानोली में हुआ भव्य स्वागत।
दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर
सिंह गाड़ेगांवलिया) l
सीकर। कहते हैं हौसले हों तो गरीबी भी
आड़े नहीं आती, इसे सच कर दिखाया
है सीकर जिले के रानोली की
बेटी अर्चना बिलोनिया ने। रैगर समाज की इस प्रतिभावान
बेटी ने किर्गिस्तान में
आयोजित 12वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग एंड बेंच प्रेस चैंपियनशिप में 192.5 किलोग्राम वजन उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया है।किर्गिस्तान में 8 से 12 सितंबर तक आयोजित इस
चैंपियनशिप में अर्चना ने दो गोल्ड
मेडल और वर्ल्ड रिकॉर्ड
चैंपियनशिप ट्रॉफी अपने नाम की। विदेशी धरती पर तिरंगा फहराकर
उन्होंने न सिर्फ राजस्थान,
बल्कि पूरे देश का नाम रोशन
किया।2024 में भी जीता था
मेडल
यह
पहला मौका नहीं है। इससे पहले वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित 11वीं वर्ल्ड स्ट्रेंथ लिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी अर्चना ने
एक गोल्ड और इनक्लाइन बेंच
प्रेस में सिल्वर मेडल जीता था।
छान के
मकान
से
वर्ल्ड
चैंपियन
तक
का
सफर
अर्चना
की कहानी हर किसी को
प्रेरित करने वाली है। उनके पिता बंशीलाल बिलोनिया मजदूर हैं और दो बड़े
भाई प्रदीप व मंजीत पत्थर
की खानों में मजदूरी करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण चार
भाई-बहनों में से सिर्फ अर्चना
ही पढ़ाई जारी रख सकी, बाकी
को 7वीं के बाद ही
पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पूरा परिवार आज भी एक
छान (झोपड़ी) के मकान में
रहता है।शुरुआती दौर में जूते, किट और डाइट तक
के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन माता-पिता ने बेटी का
हौसला कभी टूटने नहीं दिया। बाद में भामाशाहों और समाज के
सहयोग से उसे खेल
उपकरण मिले और वह लगातार
आगे बढ़ती गई।
गांव में
भव्य
स्वागत
17 सितंबर
2026 को जब अर्चना रशिया
होते हुए अपने पैतृक गांव रायपुरा-रानोली पहुंची तो रानोली बस
स्टैंड पर सर्व समाज
ने ढोल-नगाड़ों, माला और साफा पहनाकर
उनका भव्य अभिनंदन किया। पूरे गांव में जश्न का माहौल है।अर्चना
की सफलता ने साबित कर
दिया कि बेटियां किसी
से कम नहीं, बस
उन्हें एक मौका चाहिए।
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