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नेमराज बाकोलिया प्राचार्य एवं श्रीमती सरोज वर्मा को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

 


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) ।  रैगर कला, साहित्य एवं संस्कृति परिषद (पंजीकृत) एवं आत्मज्ञान पब्लिकेशन एंड फाउंडेशन, जयपुर (पंजीकृत) के संयुक्त तत्वावधान में रैगर कला, साहित्य एवं संस्कृति का समागम–2026 का भव्य आयोजन 20 सितंबर 2026 को जयपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी, झालाना डूंगरी संस्थानिक क्षेत्र के माता रमाबाई भीमराव अंबेडकर कॉन्फ्रेंस हॉल में सम्पन्न हुआ।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए रैगर समाज के साहित्यकारों, कलाकारों, लेखकों, इतिहासकारों एवं पत्रकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नकद पुरस्कार, शाल, श्रीफल व प्रशस्ति-पत्र से प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।

इस दौरान नेमराज बाकोलिया प्राचार्य एवं श्रीमती सरोज वर्मा को राजकीय सेवा में रहते हुए रैगर समाज की कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान, लोक कला एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन, समाज सेवा तथा भजन-गीत रचना एवं गायन के लिए दोनों पति पत्नी को शाल, श्रीफल, स्मृति सम्मान एवं 5100/- रुपए की राशि भेट कर ‘श्रीमती चंदो देवी सांटोलिया स्मृति कला संस्कृति सम्मान’ से विभूषित कर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान रामनिवास रैगर, गोवर्धन सौंकरिया (IPS), हरिराम मीणा (साहित्यकार), डॉ. मुरारी लाल शर्मा (साहित्यकार), कवियत्री चंद्रकांता सिंवाल (दिल्ली), किशोरी लाल पथिक (साहित्यकार) एवं रत्न कुमार सांमरिया (साहित्यकार) के कर-कमलों से प्रदान किया गया।

सांटोलिया स्मृति कला संस्कृति सम्मान"  का अवार्ड प्राप्त करने के उपरांत ख़ुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे लिए यह क्षण अत्यंत गौरव एवं प्रसन्नता का है। हम रैगर कला, साहित्य एवं संस्कृति परिषद तथा आत्मज्ञान पब्लिकेशन एंड फाउंडेशन, जयपुर के समस्त पदाधिकारियों एवं आयोजकों के प्रति हृदय से आभार एवं अभिनंदन व्यक्त करते हैं और  इस सफल एवं गरिमामय आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते है।

बाकोलिया ने आगे कहा कि ऐसे आयोजन समाज की उन प्रतिभाओं को पहचानने और सम्मानित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं, जो साहित्य, कला, संस्कृति, लोक परंपराओं एवं सामाजिक चेतना के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रही हैं। आशा है कि भविष्य में भी समाज की अदृश्य एवं उपेक्षित प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें मंच प्रदान किया जाएगा तथा उनके मनोबल को बढ़ावा दिया जाएगा।

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