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श्री श्याम प्रभु कृपा मंडल (रजिस्टर्ड),निहाल विहार, नांगलोई दिल्ली द्वारा कुंभकरण और मेघनाद वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया

 


दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) ।  नांगलोई क्षेत्र की प्रसिद्ध रामलीला श्री श्याम प्रभु कृपा मंडल (रजिस्टर्ड),निहाल विहार, नांगलोई दिल्ली द्वारा सोमवार को कुंभकरण और मेघनाद वध की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसे देखने के लिए आसपास क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दर्शक देर रात तक उत्साह के साथ रामलीला मैदान में डटे रहे और आनंद लेते रहे।

रामलीला आयोजन के दौरान पूरा प्रांगण जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा। मंचन में सबसे पहले कुंभकरण वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया। कुंभकरण के विशालकाय स्वरूप और युद्धभूमि में उसके अंत को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया। रामलीला के अंत में भगवान श्रीराम के बाणों से कुंभकरण का वध हुआ।

कुंभकरण के वध के बाद मेघनाद रावण से युद्ध की अनुमति लेकर रणभूमि में उतरता है। युद्ध के दौरान मेघनाद अपनी कुलदेवी की पूजा और यज्ञ में जुट जाता है। विभीषण श्रीराम को बताते हैं कि यदि मेघनाद का यज्ञ पूरा हो गया, तो उसे पराजित करना कठिन हो जाएगा। इस पर श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान और अंगद सहित वानर वीरों को यज्ञ भंग करने तथा मेघनाद का सामना करने के लिए भेजते हैं।

लक्ष्मण युद्धभूमि में मेघनाद का वध करने का संकल्प लेते हैं। वानर वीर यज्ञ भंग करते हैं और भीषण युद्ध के बाद लक्ष्मण मेघनाद का वध कर देते हैं। देवता लक्ष्मण की वंदना करते हैं। लक्ष्मण और मेघनाद के बीच हुए भीषण युद्ध के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।

मेघनाद के वध की खबर लंका पहुंचते ही रावण परिवार में शोक छा जाता है। मंदोदरी सहित परिजन विलाप करते हैं, लेकिन रावण इस घटना को ब्रह्मा का प्रपंच बताकर अपने परिवार को समझाने का प्रयास करता है। दूसरी ओर, लक्ष्मण श्रीराम के पास लौटते हैं।

रामलीला में हर प्रसंग एक सवाल छोड़ता है—शक्ति बड़ी है या सत्य, अहंकार बड़ा है या धर्म? रामकथा का उत्तर स्पष्ट है: विजय अंततः धर्म की ही होती है।

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