“परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर हौसले बुलंद हों, तो मंजिल जरूर मिलती है।” चिमनी लालटेन की रोशनी से वकालत और समाज सेवा तकअभावों में जन्मे नोरत मल वर्मा के सपनों ने तय किया सफलता का सफर
दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) । राजस्थान में
रैगर समाज के होनहार युवाओं
की बदलती सोच और शिक्षा के
प्रति बढ़ती जागरूकता अब गांव-गांव
तक पहुंच चुकी है। टोंक जिले की मालपुरा तहसील
के इस ऐतिहासिक कस्बे
लाम्बाहरिसिंह ने हर दौर
में अपनी पहचान को बनाए रखने
के लिए कडे संघर्ष का इतिहास रहा
है।
कठिन
परिस्थितियों में नोरत मल वर्मा ने
एक साधारण परिवार में जन्म लेकर इस प्रतिभाशाली
युवा ने सीमित संसाधनों
से मेहनत और आत्मविश्वास के
दम पर वकालत तक
की पढाई करने में सफलता हासिल कर यह साबित
कर दिया कि अब लाम्बाहरिसिंह
मालपुरा के युवा किसी
से पीछे नहीं हैं। यह सफलता आने
वाली युवा पीढ़ियों के लिए एक
मजबूत संदेश है।
नोरत
मल वर्मा एडवोकेट, लाम्बाहरिसिंह मालपुरा के जन्म दिवस
के अवसर पर बधाई और
शुभकामनाओ के साथ समाजहित
एक्सप्रेस न्यूज़ पर पेश है
उन की प्रेरणादायक संघर्ष
गाथा :-
"मेरे
पास
न
महंगे
साधन
थे,
न
सुविधाओं
से
भरा
जीवन,
लेकिन आंखों
में
सपने
थे,
दिल
में
हौसला
और
कुछ
कर
गुजरने
का
जुनून।
मैंने हालातों
से
हारना
नहीं,
उनसे
लड़ना
सीखा
है,
चिमनी-लालटेन
की
रोशनी
में
पढ़कर
अपने
भविष्य
को
गढ़ना
सीखा
है।"
संघर्षों ने
बनाया,
परिस्थितियों
ने
सिखाया:--
राजस्थान
के टोंक जिले के मालपुरा क्षेत्र
के लाम्बाहरिसिंह कस्बे में वर्ष 1993 में एक साधारण परिवार
में जन्मे नोरत मल वर्मा एडवोकेट
की कहानी केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं
है, बल्कि उन अनगिनत युवाओं
के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक अभावों
के बावजूद अपने सपनों को साकार करना
चाहते हैं।
दो
भाइयों और एक बहन
वाले परिवार में पले-बढ़े नोरत मल ने बचपन
से ही गरीबी और
आर्थिक कठिनाइयों को करीब से
देखा। पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण
करते थे। परिवार की सीमित आर्थिक
परिस्थितियों के बीच शिक्षा
प्राप्त करना आसान नहीं था, लेकिन पढ़ने और जीवन में
आगे बढ़ने की इच्छा ने
उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।
उनके
जीवन का संघर्ष किसी
एक दिन या एक परीक्षा
तक सीमित नहीं था। यह रोजमर्रा की
जरूरतों, पढ़ाई के खर्च, शारीरिक
मेहनत और भविष्य के
सपनों के बीच संतुलन
बनाने की निरंतर कोशिश
थी।
चिमनी-लालटेन
की
रोशनी
में
लिखी
गई
सफलता
की
इबारत:--
आज
के दौर में जब अनेक विद्यार्थी
आधुनिक सुविधाओं, बिजली, इंटरनेट और संसाधनों के
बीच पढ़ाई करते हैं, तब उस विद्यार्थी
की कल्पना करना भी मुश्किल हो
सकता है, जिसने चिमनी और लालटेन के
उजाले में बैठकर अपने भविष्य के सपने संजोए
हों।
नोरत मल
का
विद्यार्थी
जीवन
इसी
संघर्ष
का
प्रतीक
रहा:-
वर्ष
2009 में दसवीं और 2011 में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने
उच्च शिक्षा की ओर कदम
बढ़ाए। वर्ष 2014 में स्नातक, 2015 में बी.एड. और
2017 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी
की।
लेकिन
इन डिग्रियों के पीछे केवल
पढ़ाई नहीं थी। इनके पीछे एक मजदूर पिता
का परिश्रम, परिवार की उम्मीदें, स्वयं
की मेहनत और कठिन परिस्थितियों
के सामने हार न मानने का
संकल्प था।
उनके
लिए प्रत्येक परीक्षा केवल शैक्षणिक योग्यता हासिल करने का अवसर नहीं,
बल्कि परिस्थितियों को चुनौती देने
का एक और पड़ाव
थी।
जब हाथों
में
किताबें
भी
थीं
और
मजदूरी
के
औजार
भी:--
नोरत
मल की संघर्ष गाथा
का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय उनका विद्यार्थी जीवन है।
पढ़ाई
जारी रखने और अपनी आवश्यकताओं
को पूरा करने के लिए उन्होंने
सुबह अखबार वितरण का कार्य किया।
शादी-विवाह समारोहों में रात के समय सिर
पर लाइट रखकर काम किया। गर्मियों की छुट्टियों में
आइसक्रीम और सब्जियां बेचीं।
इतना
ही नहीं, उन्होंने पत्थर डालने, ईंटें खाली करने, बेलदारी करने, बजरी भरने, चिनाई करने, खेतों में निराई-गुड़ाई और फसल कटाई
जैसे शारीरिक श्रम वाले कार्य भी किए।
दिनभर
की मेहनत के बाद शरीर
थक जाता होगा, लेकिन किताबों से रिश्ता नहीं
टूटा।
कभी
मजदूरी की चिंता, कभी
पढ़ाई का खर्च और
कभी भविष्य की अनिश्चितता—इन
सबके बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को आंखों से
ओझल नहीं होने दिया।
यह
संघर्ष किसी काम को छोटा या
बड़ा बताने के लिए नहीं,
बल्कि मेहनत की गरिमा को
समझने के लिए महत्वपूर्ण
है।
जिस
व्यक्ति ने अपने हाथों
से मेहनत करके शिक्षा हासिल की हो, वह
श्रम करने वाले व्यक्ति की पीड़ा और
जरूरतों को बेहतर ढंग
से समझ सकता है।
यही
अनुभव आगे चलकर उनके सामाजिक सरोकारों और मानव सेवा
की सोच का आधार बना।
शिक्षक बनने
से
लेकर
कानून
की
पढ़ाई
तक:--
स्नातकोत्तर
और बी.एड. की
शिक्षा पूरी करने के बाद नोरत
मल ने वर्ष 2017 से
2020 तक एक निजी विद्यालय
में अध्यापन का कार्य किया।
शिक्षण
का यह अनुभव उनके
जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा
रहा। शिक्षा के क्षेत्र से
जुड़कर उन्हें विद्यार्थियों और समाज के
बीच ज्ञान की भूमिका को
समझने का अवसर मिला।
लेकिन
उनके सपने यहीं तक सीमित नहीं
थे।
उन्होंने
कानून की पढ़ाई करने
का निर्णय लिया और वर्ष 2021 में
एलएलबी की उपाधि प्राप्त
की। इसके बाद वे वकालत के
पेशे से जुड़ गए।
चिमनी-लालटेन के उजाले में
पढ़ाई करने वाला एक विद्यार्थी, जिसने
कभी अखबार बांटे और मजदूरी की,
अब कानून की पढ़ाई पूरी
कर न्यायिक व्यवस्था से जुड़े पेशे
में आगे बढ़ रहा था।
यह
परिवर्तन केवल पेशे का परिवर्तन नहीं
था। यह उस दृढ़
इच्छाशक्ति का परिणाम था,
जिसने कठिन परिस्थितियों के बावजूद सीखना
और आगे बढ़ना जारी रखा।
उनकी
यात्रा युवाओं को यह संदेश
देती है कि जीवन
में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां
हमेशा अनुकूल हों, यह जरूरी नहीं।
जरूरी यह है कि
व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति कितना
समर्पित है और असफलताओं
के बाद दोबारा खड़े होने का कितना साहस
रखता है।
व्यक्तिगत संघर्ष
से
सामाजिक
बदलाव
की
ओर:---
कई
लोग सफलता हासिल करने के बाद अपने
जीवन को बेहतर बनाने
में जुट जाते हैं। लेकिन नोरत मल की जीवन
यात्रा में व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामाजिक
जिम्मेदारी का भाव भी
दिखाई देता है।
उन्होंने
अपने आसपास अशिक्षा, अंधविश्वास और मृत्युभोज जैसी
सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज
उठाई। उनका मानना है कि समाज
की प्रगति केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं होती,
बल्कि शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समानता और जागरूकता से
होती है।
उनकी
सोच का आधार यह
है कि समाज में
परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति
के अपने विवेक और साहस से
होती है।
यदि
कोई परंपरा समाज पर अनावश्यक आर्थिक
बोझ डालती है या लोगों
को शिक्षा और प्रगति से
दूर करती है, तो उसके बारे
में संवाद और सुधार के
प्रयास होने चाहिए।
सामाजिक
परिवर्तन किसी एक व्यक्ति के
प्रयास से पूरा नहीं
होता, लेकिन एक व्यक्ति की
पहल अनेक लोगों को सोचने और
आगे आने के लिए प्रेरित
कर सकती है।
मानव मित्र
मण्डल
सेवा
संस्थान
की
स्थापना:
संघर्ष
से
उपजी
संवेदनशीलता:--
वर्ष
2021 में नोरत मल वर्मा ने
मानव सेवा के कार्यों को
संगठित रूप देने के उद्देश्य से
मानव मित्र मण्डल सेवा संस्थान, मालपुरा की स्थापना की।
संस्थान
के माध्यम से गरीब, अनाथ,
दिव्यांग, असहाय और जरूरतमंद लोगों
की सहायता करने का प्रयास किया
जाता है।
रक्तदान
शिविर, चिकित्सा शिविर, जन-जागरूकता अभियान
तथा सर्दियों में स्वेटर, ऊनी वस्त्र और कंबल वितरण
जैसे कार्य संस्थान की गतिविधियों में
शामिल हैं।
कोरोना
महामारी के कठिन दौर
में जरूरतमंद परिवारों तक मास्क, सैनिटाइजर
और राशन किट पहुंचाने के प्रयास भी
उनकी सेवा यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा
रहे।
जिस
व्यक्ति ने स्वयं आर्थिक
अभावों को देखा हो,
वह जरूरतमंद परिवार की परेशानी को
केवल आंकड़ों में नहीं देखता। वह जानता है
कि कई बार छोटी-सी सहायता भी
किसी परिवार के लिए बड़ी
राहत बन सकती है।
इसी
भावना के साथ मानव
मित्र मण्डल सेवा संस्थान का उद्देश्य समाज
में सहयोग, संवेदनशीलता और परोपकार की
भावना को बढ़ावा देना
है।
मानव
सेवा का अर्थ केवल
सहायता देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति के सम्मान और
आत्मविश्वास को बनाए रखते
हुए उसके साथ खड़ा होना भी है।
मंच संचालन
और
अभिव्यक्ति:
आत्मविश्वास
की
नई
पहचान
नोरत
मल के व्यक्तित्व का
एक महत्वपूर्ण पक्ष मंच संचालन और सार्वजनिक अभिव्यक्ति
भी है।
स्कूली
जीवन में प्रार्थना सभा और अन्य गतिविधियों
में भाग लेने से लोगों के
सामने बोलने का अवसर मिला।
धीरे-धीरे यही अनुभव आत्मविश्वास में बदलता गया।
आज
वे विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक मंचों
पर अपनी बात रखने तथा लोगों को जागरूक करने
का प्रयास करते हैं।
उनकी
यात्रा बताती है कि प्रभावशाली
वक्ता बनने के लिए केवल
शब्दों का ज्ञान पर्याप्त
नहीं है। अपने अनुभवों को समझना, विषय
का अध्ययन करना और लोगों की
भावनाओं को संवेदनशीलता से
व्यक्त करना भी आवश्यक है।
संघर्षों
से प्राप्त अनुभव जब सही विचारों
और अभिव्यक्ति के साथ जुड़ते
हैं, तो वे समाज
के सामने एक सार्थक संदेश
प्रस्तुत कर सकते हैं।
सामाजिक दायित्व
और
सम्मान:---
वर्तमान
में नोरत मल वर्मा निम्नलिखित
सामाजिक दायित्वों से जुड़े हुए
हैं—
- संस्थापक/अध्यक्ष — मानव मित्र मण्डल सेवा संस्थान, मालपुरा।
- जिला
उपाध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ — अखिल भारतीय रेगर महासभा, टोंक।
- विधि
एवं कानून मंत्री — रेगर समाज सुधारक महासभा, गोकर्णेश्वर, बीसलपुर।
- जिला
मंत्री भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा टोंक
मानव
सेवा और सामाजिक गतिविधियों
में योगदान के लिए उन्हें
उपखण्ड प्रशासन, मालपुरा सहित विभिन्न मंचों से सम्मानित किया
जा चुका है।
हालांकि,
किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता
की वास्तविक पहचान केवल उसके पद या सम्मान
से नहीं होती। उसकी पहचान इस बात से
बनती है कि वह
अपने दायित्वों को कितनी जिम्मेदारी
से निभाता है और समाज
के लोगों के लिए कितना
उपयोगी साबित होता है।
उनके
लिए भी सामाजिक पदों
और सम्मान का वास्तविक महत्व
तभी है, जब उनके माध्यम
से जनहित और मानव सेवा
के कार्यों को आगे बढ़ाया
जा सके।
महापुरुषों के
विचारों
से
मिलती
है
प्रेरणा---
नोरत
मल वर्मा संत कबीर, संत रविदास, महात्मा ज्योतिबा फुले, शहीद-ए-आजम सरदार
भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद और बाबा साहेब
डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से
प्रेरणा लेते हैं।
इन
महापुरुषों के विचार शिक्षा,
सामाजिक समानता, स्वाभिमान, तर्कशीलता, साहस और मानवता के
महत्व को रेखांकित करते
हैं।
बाबा
साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का शिक्षा और
सामाजिक न्याय पर दिया गया
जोर, महात्मा ज्योतिबा फुले का वंचित वर्गों
की शिक्षा के लिए संघर्ष
तथा संत कबीर और संत रविदास
की समानता संबंधी विचारधारा सामाजिक चेतना के लिए महत्वपूर्ण
प्रेरणास्रोत हैं।
इन
विचारों से प्रेरित होकर
जीवन में आगे बढ़ने का अर्थ केवल
स्वयं सफल होना नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी
अवसर और सम्मान की
भावना को मजबूत करना
है।
युवाओं
के नाम संदेश: अभावों को अपनी हार
मत बनने दो
नोरत
मल वर्मा की संघर्ष गाथा
का सबसे महत्वपूर्ण संदेश उन युवाओं के
लिए है, जो आर्थिक कठिनाइयों,
पारिवारिक जिम्मेदारियों या सीमित संसाधनों
के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने
का विचार करते हैं।
उनकी
यात्रा यह नहीं कहती
कि संघर्ष करने वाला प्रत्येक व्यक्ति निश्चित रूप से एक जैसा
मुकाम हासिल करेगा। जीवन की परिस्थितियां और
अवसर अलग-अलग होते हैं। लेकिन यह जरूर बताती
है कि निरंतर मेहनत,
शिक्षा, अनुशासन और सही दिशा
में प्रयास करने से आगे बढ़ने
के रास्ते बन सकते हैं।
युवाओं
को चाहिए कि वे अपने
माता-पिता के संघर्ष का
सम्मान करें, शिक्षा को महत्व दें,
मेहनत से पीछे न
हटें और सफलता मिलने
पर समाज के प्रति अपनी
जिम्मेदारी भी याद रखें।
मजदूरी
करना शर्म की बात नहीं
है। ईमानदारी से काम करना
सम्मान की बात है।
आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति की प्रतिभा को
समाप्त नहीं कर देते और
जीवन की शुरुआती कठिनाइयां
उसके भविष्य का अंतिम निर्णय
नहीं होतीं।
सपने
देखिए, उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत
कीजिए और जब आगे
बढ़ें, तो अपने साथ
दूसरों को भी आगे
बढ़ाने का प्रयास कीजिए।
मेरी संघर्ष
गाथा,
मेरा
संकल्प
आज
पीछे मुड़कर देखता हूं, तो चिमनी-लालटेन
की रोशनी में बिताए गए दिन, अखबार
वितरण का कार्य, शादी-विवाह समारोहों में की गई मेहनत,
खेतों में काम और निर्माण स्थलों
पर बहाया गया पसीना जीवन के महत्वपूर्ण अनुभव
दिखाई देते हैं।
इन्हीं
अनुभवों ने मेहनत की
कीमत, शिक्षा का महत्व और
जरूरतमंदों की पीड़ा को
समझने की दृष्टि विकसित
करने में भूमिका निभाई।
मेरा
प्रयास है कि वकालत
के माध्यम से कानून के
प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से
जरूरतमंदों की सहायता करने
और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से
शिक्षा, समानता तथा मानवता का संदेश आगे
बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहूं।
मैं
मानता हूं कि व्यक्ति की
सफलता का वास्तविक अर्थ
केवल अपनी परिस्थितियों को बदलना नहीं,
बल्कि अपने अनुभवों से दूसरों के
लिए प्रेरणा और सहयोग का
रास्ता तैयार करना भी है।
मेरी
पहचान संघर्ष है।
मेरी
ताकत शिक्षा है।
मेरा
स्वाभिमान मेहनत है।
मेरा
माध्यम कानून है।
और
मेरा संकल्प मानव सेवा है।
अंततः
जीवन की सार्थकता इसी
में है कि हम
अपने हिस्से की रोशनी से
किसी दूसरे के जीवन का
अंधेरा कम करने का
प्रयास करें।
"मैंने
अभावों में पढ़ना सीखा, संघर्षों में आगे बढ़ना सीखा और समाज की
पीड़ा से मानव सेवा
का महत्व समझा। मेरी कोशिश रहेगी कि जीवन में
अर्जित शिक्षा, अनुभव और कानून की
समझ का उपयोग समाज
के जरूरतमंद लोगों के हित में
कर सकूं।"


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